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BNS की धारा 82 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 82 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 82 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 82? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 82 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, और कानून के अनुसार यह दूसरी शादी अमान्य (शून्य) है, तो वह धारा 82 के अन्तर्गत 7 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है। अथवा अगर कोई व्यक्ति—अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है, तो वह 10 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-494) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 82 का विवरण (Section 82 BNS)

BNS की धारा 82 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, और कानून के अनुसार यह दूसरी शादी अमान्य (शून्य) है अथवा अगर कोई व्यक्ति—अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है, तो वह धारा 82 के अन्तर्गत 7 वर्ष से 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 82 के अनुसार (BNS Section 82 in Hindi)

82. पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना (1) जो कोई, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए, किसी ऐसी दशा में विवाह करता है, जिसमें ऐसा विवाह इस कारण से शून्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवनकाल में होता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
अपवाद- इस उपधारा का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति पर नहीं है, जिसका ऐसे पति या पत्नी के साथ विवाह सक्षम अधिकारिता के न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है और न ही किसी ऐसे व्यक्ति पर है. जो पूर्व पति या पत्नी के जीवनकाल में विवाह कर लेता है, यदि ऐसा पति या पत्नी उस पश्चात्वर्ती विवाह के समय ऐसे व्यक्ति से सात वर्ष तक निरन्तर दूर रहा है, और उस समय के भीतर ऐसे व्यक्ति द्वारा यह नहीं सुना गया है कि वह जीवित है, परन्तु यह तब जब कि ऐसा पश्चात्वर्ती विवाह करने वाला व्यक्ति उस विवाह के होने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिसके साथ ऐसा विवाह होता है, तथ्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, जहाँ तक कि उनका ज्ञान उसको हो, से अवगत करा दे।
(2) जो कोई, अपने पूर्व विवाह के तथ्य को उस व्यक्ति से छिपाकर, उससे पश्चातवर्ती विवाह करता है, वह उपधारा (1) के अधीन अपराध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 82 के अनुसार (BNS Section 82 in English)

82. Marrying again during lifetime of husband or wife.-(1) Whoever having a husband or wife living, marries in any case in which such marriage is void by reason of its taking place during the life of such husband or wife, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Exception- This sub-section does not extend to any person whose marriage with such husband or wife has been declared void by a Court of competent jurisdiction, nor to any person who contracts a marriage during the life of a former husband or wife, if such husband or wife, at the time of the subsequent marriage, shall have been continually absent from such person for the space of seven years, and shall not have been heard of by such person as being alive within that time provided the person contracting such subsequent marriage shall, before such marriage takes place, inform the person with whom such marriage is contracted of the real state of facts so far as the same are within his or her knowledge.
(2) Whoever commits the offence under sub-section (1) having concealed from the person with whom the subsequent marriage is contracted, the fact of the former marriage, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 82 एवंम् आईपीसी की धारा 494 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा दोनों में समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 82, आईपीसी की धारा 494 (और 495) का पुनर्गठित और आधुनिक रूप है।
  • बीएनएस में पहले विवाह को छिपाकर दूसरी शादी करने के अपराध को एक ही धारा में समाहित कर दिया गया है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 494BNS Section 82पहले विवाह को छिपाकर दूसरी शादी करने के अपराध को एक ही धारा में समाहित कर दिया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना-

  • 7 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

अगर कोई व्यक्ति अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है,-

  • 10 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पति या पत्नी के जीवनकाल मे पुनः विवाह करना7 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।
उस व्यक्ति से, जिसके पश्चातवर्ती विवाह किया जाताहै, पूर्ववर्ती विवाह को छिपाकर वही अपराध10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 82 (BNS 82) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 82 क्या है?

धारा 82 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, जबकि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई होती।

Q2. धारा 82 के अंतर्गत अपराध कब बनता है?

जब पहले पति या पत्नी जीवित हों, पहली शादी कानूनी रूप से वैध हो, और इसके बावजूद दूसरी शादी की जाए, तो यह अपराध माना जाता है।

Q3. इस अपराध में सजा क्या है?

सामान्य स्थिति में: 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना यदि पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर दूसरी शादी की जाए: 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

Q4. क्या हर दूसरी शादी अपराध मानी जाएगी?

नहीं। यदि पहली शादी को न्यायालय द्वारा शून्य (रद्द) घोषित कर दिया गया हो, तो दूसरी शादी अपराध नहीं होगी।

Q5. यदि पति या पत्नी लंबे समय से लापता हो, तो क्या दूसरी शादी की जा सकती है?

हां, यदि पति या पत्नी लगातार 7 वर्ष से लापता हों और इस अवधि में यह जानकारी न मिली हो कि वह जीवित हैं, तो दूसरी शादी की जा सकती है, बशर्ते कि दूसरी शादी से पहले नए जीवनसाथी को पूरी सच्चाई बता दी गई हो।

Q6. इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

विवाह संस्था की पवित्रता बनाए रखना, धोखाधड़ीपूर्ण विवाहों को रोकना और जीवनसाथी के अधिकारों की रक्षा करना।

Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
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