नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 83 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 83? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 83 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 83 के अनुसार यदि कोई कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में/कर्म पूरा कर लेता है, यह जानते हुए कि उससे कोई कानूनी (विधिपूर्ण) विवाह नहीं हो रहा है, तो वह 7 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-496) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 83 का विवरण (Section 83 BNS)
BNS की धारा 83 के अनुसार, यदि कोई कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में/कर्म पूरा कर लेता है, यह जानते हुए कि उससे कोई कानूनी (विधिपूर्ण) विवाह नहीं हो रहा है, तो वह धारा 83 के अन्तर्गत 7 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।
बीएनएस की धारा 83 के अनुसार (BNS Section 83 in Hindi)
83. विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना- जो कोई, बेईमानी से या कपटपूर्वक आशय से विवाहित होने का कर्म यह जानते हुए पूरा करता है कि उसके द्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
BNS की धारा 83 के अनुसार (BNS Section 83 in English)
83. Marriage ceremony fraudulently gone through without lawful marriage. Whoever, dishonestly or with a fraudulent intention, goes through the ceremony of being married, knowing that he is not thereby lawfully married, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
बीएनएस की धारा 83 एवंम् आईपीसी की धारा 496 मे अंतर
- अपराध की प्रकृति और सजा दोनों में समान हैं।
- बीएनएस की धारा 83, आईपीसी की धारा 496 का आधुनिक और पुनर्गठित रूप है।
- मुख्य अंतर केवल कानून का नाम और भाषा का है, जिससे प्रावधान अधिक स्पष्ट हो गया है।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 496 | BNS Section 83 | बेईमानी या धोखे का स्पष्ट आशय |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- 7 वर्ष के लिये कारावास
- और जुर्माना भी
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| किसी व्यक्ति व्दारा यह जानते हुयेकि वह तद्व्दारा विधिपूर्वक विवाहित नही हुआ है, कपटपूर्वक आशय से विवाह का कर्म करना। | 7 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना | गैर-संज्ञेय | गैर-जमानतीय | प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट। |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 83 (BNS 83) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस की धारा 83 क्या है?
धारा 83 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में पूरी करता है, जबकि उसे पता होता है कि उससे कोई विधिपूर्ण (कानूनी) विवाह नहीं हो रहा है।
Q2. इस धारा के अंतर्गत अपराध कब बनता है?
अपराध तब बनता है जब— विवाह की रस्में/कर्म पूरे किए जाएं, व्यक्ति को यह जानकारी हो कि यह विवाह कानूनन मान्य नहीं है, और यह कार्य धोखे या बेईमानी के इरादे से किया गया हो।
Q3. क्या केवल विवाह का नाटक करना भी अपराध है?
हां। यदि विवाह का नाटक या रस्में धोखे से की गई हैं और सामने वाले को यह विश्वास दिलाया गया है कि वैध विवाह हो रहा है, तो यह धारा लागू होगी।
Q4. इस अपराध में सजा क्या है?
दोषी पाए जाने पर आरोपी को 7 वर्ष तक का कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।
Q5. क्या इस धारा में न्यूनतम सजा तय है?
नहीं, इस धारा में न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है, केवल अधिकतम सजा का प्रावधान है।
Q6. क्या यह अपराध पुरुष और महिला दोनों द्वारा किया जा सकता है?
हां, यह अपराध किसी भी व्यक्ति (पुरुष या महिला) द्वारा किया जा सकता है।