नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 86 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 86? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 86 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 86 के अनुसार “क्रूरता” का मतलब ऐसे व्यवहार से है, जिससे किसी महिला को गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचे या उस पर गलत दबाव डाला जाए, यह धारा क्रूरता को परिभाषित करती है। इसके अलावा इस धारा 86 को बीएनएस नये कानून के तहत नया जोड़ा गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 86 का विवरण (Section 86 BNS)
BNS की धारा 86 के अनुसार, यदि “क्रूरता” का मतलब ऐसे व्यवहार से है, जिससे किसी महिला को गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचे या उस पर गलत दबाव डाला जाए, यह धारा क्रूरता को परिभाषित करती है।
बीएनएस की धारा 86 के अनुसार (BNS Section 86 in Hindi)
86. क्रूरता की परिभाषा - धारा 85 के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता" से अभिप्रेत है-
(क) जानबूझकर किया गया कोई आचरण, जो ऐसी प्रकृति का है, जिससे महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य की (चाहे मानसिक हो या शारीरिक) गम्भीर क्षति या खतरा कारित करने की सम्भावना है; या
(ख) किसी महिला को तंग करना, जहां उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरुद्ध मांग को पूरा करने के लिए प्रपीड़ित करने की दृष्टि से या उसके द्वारा या उससे संबंधित किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी मांग पूरा करने में असफल रहने के कारण, इस प्रकार तंग किया जा रहा है।
BNS की धारा 86 के अनुसार (BNS Section 86 in English)
86. Cruelty defined.-For the purposes of Section 85, "cruelty" means-
(a) any wilful conduct which is of such a nature as is likely to drive the woman to commit suicide or to cause grave injury or danger to life, limb or health (whether mental or physical) of the woman; or
(b) harassment of the woman where such harassment is with a view to coercing her or any person related to her to meet any unlawful demand for any property or valuable security or is on account of failure by her or any person related to her to meet such demand.
(क) जानबूझकर किया गया गंभीर दुर्व्यवहार-
अगर महिला के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जो:
- उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दे, या
- उसके जीवन, शरीर या मानसिक/शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाने वाला हो,
तो इसे क्रूरता माना जाएगा।
(ख) दहेज या संपत्ति के लिए परेशान करना
अगर किसी महिला को:
- दहेज, पैसे, जमीन, गाड़ी या किसी कीमती चीज की गैरकानूनी मांग पूरी कराने के लिए परेशान किया जाए, या
- ऐसी मांग पूरी न होने पर उसे या उसके परिवार को सताया या तंग किया जाए,
तो यह भी क्रूरता के अंतर्गत आएगा।
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 86 (BNS 86) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस की धारा 86 क्या बताती है?
यह धारा बताती है कि धारा 85 के लिए “क्रूरता” किसे कहा जाएगा। यानी किन-किन प्रकार के व्यवहार को कानून क्रूरता मानता है।
Q2. क्रूरता को कितने भागों में बाँटा गया है?
क्रूरता को दो भागों में बाँटा गया है:
1) गंभीर शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न
2) दहेज या संपत्ति की अवैध मांग के लिए उत्पीड़न
Q3. आत्महत्या के लिए मजबूर करना क्या क्रूरता है?
हाँ। यदि जानबूझकर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो, तो वह क्रूरता मानी जाएगी।
Q4. मानसिक प्रताड़ना भी क्रूरता मानी जाएगी?
हाँ। महिला के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी जानबूझकर किया गया आचरण क्रूरता है।
Q5. शारीरिक चोट पहुँचाना ही क्रूरता है या और भी शामिल हैं?
केवल शारीरिक चोट ही नहीं, बल्कि: लगातार अपमान, धमकी, डराना एवंम् मानसिक दबाव भी क्रूरता में शामिल हैं।