नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 91 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 91? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 91 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 91 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिसका उद्देश्य यह हो कि: शिशु जिंदा पैदा न हो, या शिशु के जन्म के बाद उसकी मृत्यु हो जाए, और उस काम के कारण सच में शिशु का जिंदा जन्म रुक जाता है, या जन्म के बाद शिशु मर जाता है, तो वह धारा 91 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास या जुर्माना या दोनो से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-315) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 91 का विवरण (Section 91 BNS)
BNS की धारा 91 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिसका उद्देश्य यह हो कि: शिशु जिंदा पैदा न हो, या शिशु के जन्म के बाद उसकी मृत्यु हो जाए, और उस काम के कारण सच में शिशु का जिंदा जन्म रुक जाता है, या जन्म के बाद शिशु मर जाता है, तो वह धारा 91 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंडित किया जा सकता है।
बीएनएस की धारा 91 के अनुसार (BNS Section 91 in Hindi)
91. शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय में किया गया कार्य - जो कोई, किसी शिशु के जन्म से पूर्व कोई कार्य इस आशय से करता है कि उस शिशु का पैदा होना उसके द्वारा रोका जाए या जन्म के पश्चात् उसके द्वारा उसकी मृत्यु कारित हो जाए, और ऐसे कार्य शिशु का जीवित पैदा होना रोकता है, या उसके जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित कर देता है, यदि वह कार्य माता के जीवन को बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया।
BNS की धारा 91 के अनुसार (BNS Section 91 in English)
91. Act done with intent to prevent child being born alive or to cause it to die after birth.-Whoever before the birth of any child does any act with the intention of thereby preventing that child from being born alive or causing it to die after its birth, and does by such act prevent that child from being born alive, or causes it to die after its birth, shall, if such act be not caused in good faith for the purpose of saving the life of the mother, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, or with fine, or with both.
कब अपराध नहीं माना जाएगा?
- यदि ऐसा कार्य माता की जान बचाने के लिए,
- ईमानदारी (सद्भाव) से किया गया हो, तो यह अपराध नहीं होगा।
बीएनएस की धारा 91 एवंम् आईपीसी की धारा 315 मे अंतर
- अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
- अंतर मुख्यतः भाषा, संरचना और प्रस्तुति का है।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 315 | BNS Section 91 | भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- 10 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना
- या दोनों
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| बालक का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय मे किया गया कार्य। | 10 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनों। | संज्ञेय | गैर-जमानतीय | सेशन न्यायालय |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 91 (BNS 91) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस की धारा 91 क्या है?
यह धारा उस अपराध से संबंधित है जिसमें किसी शिशु के जीवित जन्म को रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु कराने के उद्देश्य से कोई कार्य किया जाता है।
Q2. इस धारा में अपराध कब बनता है?
जब: ऐसा कार्य जानबूझकर किया जाए, उद्देश्य शिशु का जिंदा पैदा होना रोकना या जन्म के बाद मार देना हो, और वह कार्य माँ की जान बचाने के लिए ईमानदारी से न किया गया हो।
Q3. क्या माँ की जान बचाने के लिए किया गया कार्य अपराध है?
नहीं। यदि कार्य माता के जीवन की रक्षा के लिए सद्भावपूर्वक (Good Faith) किया गया है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
Q4. इस धारा के तहत सजा क्या है?
दोष सिद्ध होने पर: 10 वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
Q5. क्या यह अपराध जमानती है?
यह गैर-जमानती माना जाता है। जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है।