नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 92 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 92? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 92 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 92 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा खतरनाक या गलत काम करता है, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) माना जाता, और उस काम के कारण गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 92 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास और जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-316) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 92 का विवरण (Section 92 BNS)
BNS की धारा 92 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा खतरनाक या गलत काम करता है, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) माना जाता, और उस काम के कारण गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 92 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
बीएनएस की धारा 92 के अनुसार (BNS Section 92 in Hindi)
92. ऐसे कार्य द्वारा जो आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात मृत्यु कारित करना- जो कोई ऐसा कोई कार्य ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उसके द्वारा मृत्यु कारित कर देता, तो वह आपराधिक मानव वध का दोषी होता और ऐसे कार्य द्वारा किसी सजीव अजात की मृत्यु कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष सकेगी दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
दृष्टान्त
क, यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह गर्भवती महिला की मृत्यु कारित कर दे, ऐसा कार्य करता है, जो उस महिला को मृत्यु कारित हो जाती. तो वह आपराधिक मानव वध की कोटि में आता। उस महिला की क्षति होती है, किन्तु उसकी मृत्यु नहीं होती, किन्तु उसके द्वारा उस अजात सजीव शिशु की मृत्यु हो जाती है, जो उसके गर्भ में है। क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
BNS की धारा 92 के अनुसार (BNS Section 92 in English)
92. Causing death of quick unborn child by act amounting to culpable homicide. Whoever does any act under such circumstances, that if he thereby caused death he would be guilty of culpable homicide, and does by such act cause the death of a quick unborn child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Illustration
A, knowing that he is likely to cause the death of a pregnant woman, does an act which, if it caused the death of the woman, would amount to culpable homicide. The woman is injured, but does not die; but the death of an unbom quick child with which she is pregnant is thereby caused. A is guilty of the offence defined in this section.
बीएनएस की धारा 92 एवंम् आईपीसी की धारा 316 मे अंतर
- दोनों धाराएँ उस स्थिति पर लागू होती हैं जब कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जिससे गर्भ में जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है।
- यदि यह कार्य माँ की जान बचाने के लिए ईमानदारी से किया गया हो
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 316 | BNS Section 92 | भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- 10 वर्ष के लिये कारावास
- और जुर्माना
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| ऐसे कार्य व्दारा, जो आपराधिक मानव वध की कोटि मे आता है, किसी सजीव अजात् बालक की मृत्यु कारित करना। | 10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना । | संज्ञेय | गैर-जमानतीय | सेशन न्यायालय |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 92 (BNS 92) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस की धारा 92 क्या है?
यह धारा उस स्थिति पर लागू होती है जब कोई व्यक्ति ऐसा खतरनाक या आपराधिक कार्य करता है, जिससे गर्भ में जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, और यदि वही कार्य किसी व्यक्ति की मृत्यु कर देता, तो वह आपराधिक मानव वध माना जाता।
Q2. इस धारा में किस प्रकार का अपराध शामिल है?
यह अपराध गंभीर प्रकृति का अपराध है, क्योंकि इसमें गर्भस्थ जीवित शिशु की मृत्यु होती है।
Q3. क्या महिला की मृत्यु होना आवश्यक है?
नहीं। यदि महिला जीवित रहती है, लेकिन गर्भ में पल रहे सजीव अजात शिशु की मृत्यु हो जाती है, तब भी यह धारा लागू होती है।
Q4. क्या गर्भवती महिला की सहमति से किया गया कार्य अपराध नहीं होगा?
नहीं। महिला की सहमति होने पर भी, यदि किया गया कार्य इस धारा की शर्तों में आता है, तो वह अपराध ही माना जाएगा।
Q5. क्या कोई अपवाद (Exception) भी है?
हाँ। यदि ऐसा कार्य माँ का जीवन बचाने के लिए सद्भावपूर्वक किया गया हो, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
Q6. इस धारा का उद्देश्य क्या है?
इस धारा का उद्देश्य गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे के जीवन की रक्षा करना और ऐसे गंभीर कृत्यों को दंडित करना है।