HomeLabour LawImportant Rights of private employee under the Indian Labour Law | भारतीय...

Important Rights of private employee under the Indian Labour Law | भारतीय श्रम कानून के तहत निजी कर्मचारियों के महत्वपूर्ण अधिकार

भारत में निजी कर्मचारियों (Important Rights of Private employee) को चार (New Labour Code 2025) नये लेबर कोड (नवंबर 2025 से लागू) के तहत मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थितियों और विवाद निपटान से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। ये संहिताएं 29 पुराने कानूनों को एकीकृत करती हैं और संगठित निजी क्षेत्र पर लागू होती हैं। कान्ट्रेक्ट वाले कर्मचारियों को भी पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे लाभ मिलते हैं जहां पात्रता पूरी हो। निजी सेक्टर के कर्मचारियों के भी भारतीय श्रम कानूनों के तहत कई मूलभूत अधिकार हैं, जिन्हें लिखित कॉन्ट्रैक्ट या कंपनी पॉलिसी घटा नहीं सकती।

निजी कर्मचारियों के महत्वपूर्ण अधिकार (Important Rights of private employee)

निजी कर्मचारियों के भारतीय श्रम कानून के तहत 8 महत्वपूर्ण अधिकार: न्यूनतम वेतन (राज्यवार निर्धारित), समयबद्ध वेतन भुगतान बिना अनुचित कटौती के। प्रति सप्ताह 48 घंटे कार्य सीमा, ओवरटाइम पर दोगुना वेतन। 20+ कर्मचारियों वाली फर्म में PF (12% योगदान दोनों पक्ष से), ESIC से मेडिकल लाभ। 5 वर्ष सेवा पर ग्रेच्युटी (अधिकतम 20 लाख)। महिलाओं को 26 सप्ताह मातृत्व अवकाश। सुरक्षित कार्यस्थल, भेदभाव मुक्त वातावरण, यौन उत्पीड़न रोकथाम। अनुचित बर्खास्तगी पर श्रम अदालत में शिकायत।

नियुक्ति पत्र एवंम् रोजगार अनुबंध

निजी कर्मचारियों (Private Employees) Private employee rights India को जॉइन करते समय लिखित अपॉइंटमेंट लेटर/एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट लेने का अधिकार है, जिसमें काम की प्रकृति, वेतन, समय, छुट्टियाँ, नोटिस पीरियड आदि साफ़-साफ लिखे हों। नए लेबर कोड के तहत लिखित अनुबंध से ही न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी, PF, ESIC जैसे Weekly Off, Leave Policy, Probation, Notice Period, PF/ESI/Gratuity व अन्य Social Security लाभ, प्रमोशन/इंक्रीमेंट आदि लाभों का भी लिखित रूप से अनुबंध हो। जहां Permanent, Probationer, Fixed Term Contract Labour (कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिये) और Daily Wagers सभी को लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा। अगर पहले सिर्फ़ मौखिक करार या साधारण ऑफर लेटर दिया गया था, तो नये कोड लागू होने के बाद 3 महीने के अंदर नया Appointment Letter जारी करना होगा।

वेतन, न्यूनतम वेतन व समान वेतन

न्यूनतम् वेतन अधिनियम के अन्तर्गत प्रत्येक कर्मचारी को कम से कम वैधानिक न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन और बिना गैर‑कानूनी कटौती के वेतन पाने का अधिकार है; न्यूनतम वेतन से कम देना गैरकानूनी है। समान काम के लिए स्त्री‑पुरुष (और ट्रांसजेंडर) को समान वेतन देना अनिवार्य है; लैंगिक आधार पर वेतन भेदभाव प्रतिबंधित है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज निर्धारित करती है, राज्य इसे न्यूनतम रखते हुए अपनी दरें तय करते हैं।

कार्य घण्टे, ओवरटाइम और अवकाश

सामान्यतः प्रत्येक नियोक्ता अधिकतम 8–9 घण्टे प्रतिदिन और 48 घण्टे प्रति सप्ताह से अधिक काम नहीं कराया जा सकता है। इससे अधिक काम ओवरटाइम की श्रेणी मे आयेगा। Working hours in India ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति आवश्यक है और इसका भुगतान सामान्य दर से दोगुनी दर पर होना चाहिए; साप्ताहिक अवकाश और निर्धारित ब्रेक (जैसे आधे घण्टे का लंच) भी अधिकार हैं। 240 कार्यदिवस पर 12 दिन वार्षिक अवकाश, कैजुअल/बीमारी अवकाश और सार्वजनिक अवकाश मिलते हैं। women emplooyee महिलाओं को रात्रि पाली (सुबह 7 बजे बाद) के लिए सहमति, ओवरटाइम भुगतान और सुरक्षित परिवहन जरूरी है।

सामाजिक सुरक्षा: PF, ESIC, ग्रेच्युटी

EPF कानून व सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), पेंशन एवं संबंधित योगदानों का अधिकार है; नियोक्ता व कर्मचारी दोनों योगदान करते हैं। वेतन सीमा और अन्य शर्तों के अनुसार कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) के तहत चिकित्सा सुविधा, बीमारी लाभ, मातृत्व लाभ आदि अधिकार मिलते हैं, और 5+ वर्ष की निरंतर सेवा पर ग्रेच्युटी देनी होती है। नये लेबर कोड नियम के तहत अब गिग/प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा और ग्रेच्युटी कवरेज; एग्रीगेटर्स को 1-2% टर्नओवर योगदान।

सुरक्षित कार्यस्थल, भेदभाव व उत्पीड़न से सुरक्षा

कर्मचारियों को सुरक्षित, स्वच्छ कार्यस्थल, बेसिक सुविधाएँ (पीने का पानी, शौचालय, वेंटिलेशन आदि) और स्वास्थ्य‑सुरक्षा उपायों का अधिकार है। यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) समेत किसी भी तरह के उत्पीड़न व भेदभाव (लिंग, धर्म, जाति आदि के आधार पर) से सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र (ICC/PoSH कमेटी आदि) का अधिकार है।

मातृत्व/पितृत्व और अन्य छुट्टियाँ

महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ अधिनियम के अनुसार निर्धारित अवधि की पेड मैटरनिटी लीव, मेडिकल बोनस और नौकरी की सुरक्षा का अधिकार है; नए कोड इन प्रावधानों को सामाजिक सुरक्षा के हिस्से के रूप में मजबूत करते हैं। कई राज्यों/कंपनियों में पितृत्व अवकाश, अर्जित अवकाश, मेडिकल/कैज़ुअल लीव आदि नीति के रूप में दी जाती हैं, जिन्हें मनमाने ढंग से नकारा नहीं जा सकता।

सेवा समाप्ति, नोटिस और अंतिम भुगतान

नियमों व नियुक्ति पत्र के अनुसार उचित कारण, प्रक्रिया और नोटिस पीरियड के बिना अचानक नौकरी से निकालना कानूनन चुनौती योग्य है; औद्योगिक संबंध कोड में ले‑ऑफ/रिट्रेन्चमेंट के लिए स्पष्ट प्रक्रिया है। इस्तीफ़ा, टर्मिनेशन या रिट्रेन्चमेंट की स्थिति में बकाया वेतन, छुट्टी एन्कैशमेंट आदि आम तौर पर 2 कार्य दिवस के भीतर/कानून में निर्धारित अवधि में देना अनिवार्य है।

मुख्य श्रम अधिकार (Important Labour Rights)

  • न्यूनतम मजदूरी और समय पर वेतन भुगतान का अधिकार, जिसमें ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान शामिल है।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन, लिंग या जाति आधारित भेदभाव से मुक्ति।
  • अधिकतम 48 घंटे साप्ताहिक कार्य, दैनिक 8-9 घंटे सीमा, साप्ताहिक अवकाश और ब्रेक।
  • 12 दिन वार्षिक अवकाश, बीमारी/कैजुअल लीव और सार्वजनिक अवकाश अलग से।
  • पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी (5 वर्ष बाद) जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ।
  • महिलाओं को 26 सप्ताह मातृत्व अवकाश और रात्रि शिफ्ट के लिए सुरक्षा।
  • कार्यस्थल पर स्वास्थ्य, सुरक्षा और यौन उत्पीड़न रोकथाम।
  • अनुचित बर्खास्तगी या विवाद के लिए श्रम अदालत/आयुक्त के पास शिकायत।

न्यूनतम् वेतन नियम क्या हैं?

भारतीय न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम 1948 (Minimum Wages Act, 1948) निजी क्षेत्र के कर्मचारियों सहित अनुसूचित रोज़गारों में न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करता है, जो केंद्र या राज्य सरकार (जो अधिक हो) द्वारा निर्धारित होता है। यह पूरे भारत में लागू है और कौशल स्तर (अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल) तथा उद्योग/क्षेत्र के आधार पर भिन्न होता है।

मुख्य नियम

  • नियोक्ता को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं कर सकता; इसमें मूल वेतन, महंगाई भत्ता (DA) और अन्य अनुमत भत्ते शामिल होते हैं।
  • वेतन मासिक रूप से उद्धृत होता है, लेकिन दैनिक गणना 26 दिनों पर आधारित होती है (साप्ताहिक अवकाश को ध्यान में रखते हुए)।​
  • राज्यवार संशोधन अप्रैल और अक्टूबर में महंगाई के आधार पर होते हैं, तथा कोड ऑन वेज़ेज़ 2019 के तहत दंड कठोर हैं।

उत्तर प्रदेश के वर्तमान दरें

New Labour Code 2025 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक (नवीनतम अधिसूचना 26 सितंबर 2025 के अनुसार) निम्न दरें लागू हैं। न्यूनतम वेतन अधिनियम के अन्तर्गत प्रत्येक जिले और शहर के अनुसार से अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल कर्मचारियों के लिये न्यूनतम् मासिक वेतन अलग-अलग हो सकते है। जहां आप Shram Suvida पोर्टल पर जाकर चेक कर सकते है।

श्रेणीमासिक वेतन
अकुशल (Unskilled)11021/-
अर्द्धकुशल (Semi-skilled)12123/-
कुशल (Skilled)13580/-

उल्लंघन पर दंड

  • न्यूनतम वेतन से कम भुगतान पर पहली बार ₹50,000 तक जुर्माना; दोहराने पर 3 माह कैद और/या ₹1 लाख जुर्माना।
  • कर्मचारी दावा दायर कर सकता है, और साबित करने का बोझ नियोक्ता पर है। नियोक्ता को रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

RAHUL Singh tomer on NRC क्या है :-