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मुद्दा-370 और 35A

मुद्दा-370 फिल्म का पोस्टर
अनुच्छेद 370 भारत देश की आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह यह चाहते थे कि हमारा कश्मीर भी भारत का एक अहम हिस्सा बने लेकिन भारत देश आजाद होते ही भारत और पकिस्तान दो हिस्सो मे बंट गया था और अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थक की कुछ अलगाववादी लोग स्वार्थ राजनीति के चक्कर मे “आजाद कश्मीर सेना” ने पाकिस्तान सेना के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और काफी हिस्सा कश्मीर का हथिया लिया था । इस परिस्थिति मे महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिये शेख अब्दुल्ला और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सहमति से 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ जम्मू-कश्मीर को आस्थायी विलय की घोषणा कर दी और “Instruments of Accession of Jammu & Kashmir to India” सहमति के लिये हस्ताक्षर भी किये थे । अनुच्छेद 370 और 35A नवम्बर 1952 मे लागू किया गया था, यह अनुच्छेद कश्मीर के नागरिको को बहुत सी सुविधाये भी देता है, जो कि भारत के अन्य किसी नागरिक को नही देता है । अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान है और इसका प्रशासन भी इसी के अनुसार चलता है । जम्मू-कश्मीर मे अनुच्छेद 370 लगने के कारण भारत के संविधान से नही चलता है ।
अनुच्छेद- 370 जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को निम्न अधिकार देता है?• जम्मू-कश्मीर, भारत का एक संवैधानिक राज्य है, किन्तु इसका नाम, क्षेत्रफल और सीमा को केंद्र सरकार तभी बदल सकता है जब जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार इसकी अनुमति दे ।• इस अनुच्छेद के अनुसार रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसी कारण जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान है और इसका प्रशासन इसी के अनुसार चलाया जाता है ना कि भारत के संविधान के अनुसार।• जम्मू-कश्मीर के पास 2 झन्डे हैं. एक कश्मीर का अपना राष्ट्रीय झंडा है और भारत का तिरंगा झंडा यहाँ का राष्ट्रीय ध्वज है।• देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं. अर्थात इस राज्य में संपत्ति का मूलभूत अधिकार है। • कश्मीर के लोगों को 2 प्रकार की नागरिकता मिली हुई है, एक कश्मीर की और दूसरी भारत की।
• यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता ख़त्म हो जाती है । लेकिन यदि वह किसी पाकिस्तानी से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।• यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता है तो उसको भारतीय नागरिकता भी मिल जाती है।• सामान्यतः ऐसा होता है कि जब कोई भारतीय नागरिक भारत के किसी राज्य को छोड़कर किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है, लेकिन जब कोई जम्मू- कश्मीर का निवासी पाकिस्तान चला जाता है और जब कभी वापस जम्मू-कश्मीर आ जाता है तो उसको दुबारा भारत का नागरिक मान लिया जाता है।• भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) और भाग 4 A (मूल कर्तव्य) इस राज्य पर लागू नहीं होते हैं. अर्थात इस प्रदेश के नागरिकों के लिए महिलाओं की अस्मिता, गायों की रक्षा और देश के झंडे इत्यादि का सम्मान करना जरूरी नहीं है।

• जम्मू – कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज इत्यादि) का अपमान करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

• अनुच्छेद- 370 के कारण ही केंद्र, राज्य पर वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) जैसा कोई भी कानून नहीं लगा सकता है, अर्थात यदि भारत में कोई वित्तीय संकट आता है और भारत सरकार वित्तीय आपातकाल की घोषणा करती है तो इसका जम्मू-कश्मीर राज्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।• भारत के संविधान में किसी प्रकार का संशोधन जम्मू-कश्मीर पर स्वतः लागू नहीं होता है जब तककि इसे राष्ट्रपति के विशेष आदेश व्दारा लागू करने की अनुमति ना दी जाये ।• केंद्र, जम्मू-कश्मीर पर केवल दो दशाओं: युद्ध और बाहरी आक्रमण के मामले में ही राष्ट्रीय आपातकाल लगा सकता है, जब तक राष्ट्रपति इसके लिये विशेष आदेश न जारी करे । क्या अनुच्छेद-370 को हटाया जा सकता है?अनुच्छेद-370(3) व 370(2) के अन्तर्गत राष्ट्रपति अगर चाहे तो वह अपने विशेष आदेश को पारित करने के पश्चात् पूर्वगामी प्रावधानों में कुछ भी होने के बावजूद, राष्ट्रपति, सार्वजनिक अधिसूचना व्दारा यह घोषणा कर सकते हैं कि संसद चाहे एक विधेयक पर विचार कर सकती है जो की भारत की संघीय प्रणाली का एक आवश्यक सुरक्षा उपाय है इस मामले मे राज्य स्तरीय सरकार व्दारा कोई पालन नही किया गया था, इस कथन को माननीय अमित शाह जी ने कानूनी फैसले का आह्वान किया क्योकि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा भंग हो गयी है और राज्य केन्द्रीय शासन के आधीन है । राज्य की संविधान सभा की सिफारिश को खंड (2) में निर्दिष्ट करने से पहले राष्ट्रपति को इस तरह की अधिसूचना जारी करने की आवश्यकता होगी ।
अनुच्छेद-35एइसी तरह से अनुच्छेद-35ए भी संविधान में शामिल प्रावधान है जो जम्मू और कश्मीर विधानमंडल को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह यह तय करे कि जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी कौन है और किसे सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जायेगा, किसे संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, किसे जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार होगा, छात्रवृत्ति तथा अन्य सार्वजनिक सहायता और किसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा। अनुच्छेद-35A में यह प्रावधान है कि यदि राज्य सरकार किसी कानून को अपने हिसाब से बदलती है तो उसे किसी भी कोर्ट में चुनौती नही दी जा सकती है ।अनुच्छेद-35A,14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था । इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गया था । यह अनुच्छेद किसी गैर कश्मीरी व्यक्ति को कश्मीर में जमीन खरीदने से रोकता है।भारत के किसी अन्य राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी नही बन सकता है और इसी कारण वहां वोट नही डाल सकता है।अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।यह आर्टिकल भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव करता है क्योंकि इस आर्टिकल के लागू होने के कारण भारत के लोगों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया जबकि पाकिस्तान से आये घुसपैठियों को नागरिकता दे दी गयी ।अतः भारत सरकार व्दारा अनुच्छेद-370 को अनुच्छेद-370 के भाग 3 व 2 के अन्तर्गत आस्थायी करने हेतु राष्ट्रपति व्दारा विधेयक जारी करने के पश्चात् जम्मू-कश्मीर भी भारत का ही अहम हिस्सा है । जो अब अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर से पूर्णतयाः आस्थायी हो गयी है और 35A भी अब पूर्ण रूप से आस्थायी है । एक बॉलीवुड की एक फिल्म भी बनी थी जिसका नाम मुद्दा-370 है जिसे जरूर देखे जिसमे बताया गया कैसे और क्यो लगाया गया अनुच्छेद-370, और जानिये भारत के रहने वाले कश्मीरी नागरिक को कैसे घर से बेघर किया गया ।

Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
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