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मानवाधिकार व गुलामी-:

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मानवाधिकार या मानव अधिकार का आशय पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को संविधान व्दारा स्वातन्त्रता एवंम् समानता का अधिकार दिया गया है, दिनांक 10 दिसम्बर 1948 को प्रान्स मे मानव अधिकारों की सर्वभौमिक घोषणा के आधार पर विश्व मानवाधिकार 10 दिसम्बर को मनाया जाता है, (UNHRC) पेरिस व्दारा 1993 को कहा गया कि दुनिया के सभी देशो को राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थान स्थापित करना होगा । इस तरह से भारत मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 को बना । (UNHRC) विश्व स्तर पर मानवधिकार Human Right Council 15 मार्च 2016 को स्वीट्जरलैण्ड जिनेवा मे बनाया गया ।

मानवाधिकार कानून 8 जनवरी 1994 को सम्पूर्ण भारत (जम्मू एवंम् कश्मीर भी शामिल) मे राष्ट्रपति अध्यादेश के व्दारा लागू कर दिया गया था, और अभी तक भारत मे मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम अभी तक दो बार संसोधित किया जा चुका है  प्रथम बार मानवाधिकार संरक्षण संसोधन अधिनियम 2006, 23 नवम्बर 2006 को संसोधित किया गया था और दूसरी बार मानवाधिकार संरक्षण संसोधन अधिनियम 2019, 27 जुलाई 2019 को संसोधित किया गया था।

मानवाधिकार- लिंग, राष्ट्रीयता, निवास स्थान, लिंग, जातीयता, धर्म, रंग या अन्य वर्गीकरण की परवाह किए बिना, सभी मानव अधिकारों पर निहित मानव अधिकार हैं। इस प्रकार, मानवाधिकार गैर-भेदभावपूर्ण हैं, जिसका अर्थ है कि सभी मानव उनके लिए हकदार हैं और उन्हें बाहर नहीं किया जा सकता है। बेशक, जबकि सभी मनुष्य मानव अधिकारों के हकदार हैं, सभी मनुष्यों को दुनिया भर में समान रूप से अनुभव नहीं करते हैं। कई सरकारें और व्यक्ति मानवाधिकारों की अनदेखी करते हैं और अन्य मनुष्यों का घोर शोषण करते हैं।

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