नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2B, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2B का विवरण
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -2B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन किसी बात के होते हुए भी और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं, यानीय इंजीनियरी, यांत्रिक रूप से नोदित यानों और साधारणतया परिवहन के क्षेत्रों में नवपरिवर्तन का और अनुसंधान तथा विकास का संवर्धन करने के लिए यांत्रिक रूप से नोदित कतिपय किस्म के यानों को इस अधिनियम के उपबंधों के लागू होने से छूट प्रदान कर सकेगी।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2B के अनुसार
नवपरिवर्तन का संवर्धन-
केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं, यानीय इंजीनियरी, यांत्रिक रूप से नोदित यानों और साधारणतया परिवहन के क्षेत्रों में नवपरिवर्तन का और अनुसंधान तथा विकास का संवर्धन करने के लिए यांत्रिक रूप से नोदित कतिपय किस्म के यानों को इस अधिनियम के उपबंधों के लागू होने से छूट प्रदान कर सकेगी।
Promotion of innovation- Notwithstanding anything contained in. this Act and subject to such conditions as may be prescribed by the Central Government, in order to promote innovation, research and development in the fields of vehicular engineering, mechanically propelled vehicles and transportation in general, the Central Government may exempt certain types of mechanically propelled vehicles from the application of the provisions of this Act.
हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 2B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2A का विवरण
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -2A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन ई-गाड़ी और ई-रिक्शा से भाड़े या पारिश्रमिक के लिये यथास्थिति, माल या यात्रियों के वहन हेतु ऐसे विनिर्देशों के अनुसार, जो इस निमित्त विहित किए जाएं, विनिर्मित, सन्निर्मित या अनुकूलित, सुसज्जित और अनुरक्षित एक तीन पहियों वाला 4000 वाट से अनधिक विद्युत शक्ति का विशेष प्रयोजन बैटरी युक्त यान अभिप्रेत है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2A के अनुसार
ई-गाड़ी और ई-रिक्शा-
(1) धारा 7 की उपधारा (1) के परंतुक और धारा 9 की उपधारा (10) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के उपबंध ई-गाड़ी और ई-रिक्शा को लागू होंगे। (2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “ई-गाड़ी या ई-रिक्शा’ से, भाड़े या पारिश्रमिक के लिए, यथास्थिति, माल या यात्रियों के वहन हेतु ऐसे विनिर्देशों के अनुसार, जो इस निमित्त विहित किए जाएं, विनिर्मित, सन्निर्मित या अनुकूलित, सुसज्जित और अनुरक्षित एक तीन पहियों वाला 4000 वाट से अनधिक विद्युत शक्ति का विशेष प्रयोजन बैटरी युक्त यान अभिप्रेत है ।
E-cart and e-rickshaw- (1) Save as otherwise provided in the proviso to sub-section (1) of section 7 and sub-section (10) of section 9, the provisions of this Act shall apply to e-cart and e-rickshaw. (2) For the purposes of this section, “e-cart or e-rickshaw” means a special purpose battery-powered vehicle of power not exceeding 4000 watts, having three wheels for carrying goods or passengers, as the case may be, for hire or reward, manufactured, constructed or adapted, equipped and maintained in accordance with such specifications, as may be prescribed in this behalf.
हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 2A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा-2 का विवरण
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -2 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन मे मोटर वाहन अधिनियम को परिभाषित किया गया है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 2 के अनुसार
परिभाषाएँ-
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो :- (1) “रूपांतरित यान” से कोई मोटर यान अभिप्रेत है, जिसे या तो विनिर्दिष्टत: डिजाइन और विनिर्मित किया गया है या जिसमें किसी शारीरिक विकार या निःशक्तता से पीड़ित व्यक्ति के उपयोग के लिए धारा 52 की उपधारा (2) के अधीन परिवर्तन किए गए हैं और उसका ऐसे व्यक्ति द्वारा या उसके लिए एकमात्र रूप से उपयोग किया जाता है; (1क) “समूहक” से कोई डिजीटल मध्यवर्ती या किसी यात्री के लिए परिवहन के प्रयोजन के लिए चालक से संयोजित होने के लिए कोई बाजार स्थान अभिप्रेत है; (1ख) इस अधिनियम के किसी उपबंध के संबंध में “क्षेत्र” से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जैसा राज्य सरकार उस उपबंध की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;] [मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित] (2) “संलग्न यान” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जिससे कोई अर्द्ध-ट्रेलर संलग्न है; (3) किसी यान की धुरी के संबंध में “धुरी भार” से उस धुरी के साथ लगे हुए कई पहियों द्वारा, उस भू-तल पर, जिस पर वह यान टिका हुआ है, संप्रेषित कुल भार अभिप्रेत है; (4) “रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र” से सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिया गया इस आशय का प्रमाणपत्र अभिप्रेत है कि मोटर यान को अध्याय 4 के उपबंधों के अनुसार सम्यक रूप से रजिस्टर कर दिया गया है। (4क) “समुदाय सेवा” से कोई असंदत्त कार्य अभिप्रेत है जिसका किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के अधीन किए गए किसी अपराध के लिए दंड के रूप में किया जाना अपेक्षित है;] [मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा अंत:स्थापित ] (5) मंजिली गाड़ी के संबंध में, “कन्डक्टर” से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो यात्रियों से किराया संगृहीत करने, उनका मंजिली गाड़ी में प्रवेश करना या उसमें से बाहर जाना विनियमित करने और ऐसे अन्य कृत्य करने में लगा हुआ है जो विहित किए जाएं; (6) “कन्डक्टर अनुज्ञप्ति” से सक्षम प्राधिकारी द्वारा अध्याय 3 के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है जो उसमें विनिर्दिष्ट व्यक्ति को कन्डक्टर के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत करती है; (7) “ठेका गाड़ी” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो भाड़े या पारिश्रमिक पर यात्री या यात्रियों का वहन करता है और जो किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे यान के संबंध में किसी परमिट के धारक या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के साथ ऐसे सम्पूर्ण यान के उपयोग के लिए की गई किसी अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा के अधीन, उसमें वर्णित यात्रियों के किसी नियत या तय हुई दर या धनराशि पर– (क) समय के आधार पर, चाहे वह किसी मार्ग या दूरी के प्रति निर्देश से है अथवा नहीं; या (ख) एक स्थान से अन्य स्थान तक, वहन में लगा है, और इन दोनों में से किसी भी दशा में, यात्रा के दौरान ऐसे यात्रियों को, जो संविदा में सम्मिलित नहीं है, चढ़ाने या उतारने के लिए कहीं भी रुकता नहीं है, और इसके अन्तर्गत– (i) बड़ी टैक्सी; और (ii) मोटर टैक्सी, इस बात के होते हुए भी है कि इसके यात्रियों से अलग-अलग किराए प्रभारित किए जाते हैं : (8) “व्यवहारी” के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है जो– [***] [1994 के अधिनियम संख्यांक 54, धारा 2 द्वारा उप-खण्ड (क) विलोपित (14-11-1994 से प्रभावशील )] (ख) चैसिस से संलग्न करने के लिए बॉडियों के निर्माण; या (ग) मोटर यानों की मरम्मत; या (घ) मोटर यानों के आडमान, पट्टा पर देने या अवक्रय, में लगा हुआ है; (9) “ड्राइवर” के अन्तर्गत किसी ऐसे मोटर यान के संबंध में जो किसी अन्य मोटर यान से चलाया जाता है, वह व्यक्ति भी है जो चलाए जाने वाले यान के अनुचालक के रूप में कार्य करता है; (9क) “चालक पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम” से धारा 19 की उपधारा (2क) में निर्दिष्ट पाठ्यक्रम अभिप्रेत है;] [मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा अंत:स्थापित ] (10) “चालन-अनुज्ञप्ति” से ऐसी अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा अध्याय 2 के अधीन दी गई है और जो उसमें विनिर्दिष्ट व्यक्ति को मोटर यान या किसी विनिर्दिष्ट वर्ग या वर्णन का मोटर यान शिक्षार्थी से भिन्न रूप में चलाने के लिए प्राधिकृत करती है; (11) “शिक्षा संस्था बस” से ऐसी कोई बस अभिप्रेत है जो किसी महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था के स्वामित्वाधीन है और जिसका उपयोग शिक्षा संस्था के किसी क्रियाकलाप के संबंध में, विद्यार्थियों और कर्मचारिवन्द के परिवहन के प्रयोजन के लिए ही किया जाता है; (12) “किराए” के अंतर्गत वे धनराशियाँ हैं जो किसी सीजन टिकट के लिए अथवा ठेका गाड़ी के भाड़े की बाबत संदेय है; (12क) “स्वर्णिम घंटा” से अभिघात, क्षति के पश्चात् एक घंटे तक रहने वाली कालावधि अभिप्रेत है जिसके दौरान तुरंत चिकित्सा देखरेख प्रदान करके मृत्यु को निवारित करने की अधिकतम संभावना है।] [मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा अंत:स्थापित ] (13) “माल” के अंतर्गत जीवित व्यक्तियों के सिवाय यान द्वारा ले जाया जाने वाला पशुधन और (यान में मामूली तौर पर काम आने वाले उपस्कर से भिन्न) कोई भी चीज है, किन्तु मोटर कार में या मोटर कार से संलग्न ट्रेलर में वहन किया जाने वाला सामान या निजी चीजबस्त या यान में यात्रा करने वाले यात्रियों का निजी सामान इसके अंतर्गत नहीं है; (14) “माल वाहन” से ऐसा कोई मोटर यान अभिप्रेत है जो केवल माल ढोने के काम के लिए निर्मित या अनुकूलित है या ऐसा कोई मोटर यान भी, जो ऐसे निर्मित या अनुकूलित नहीं है, उस दशा में अभिप्रेत है जबकि उसका उपयोग माल ढोने में किया जाता है; (15) किसी यान की बाबत “सकल यान भार” से यान का कुल भार और उस यान के लिए रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञेय रूप में प्रमाणित और रजिस्ट्रीकृत भार अभिप्रेत है; (16) “भारी माल यान” से अभिप्रेत है ऐसा कोई माल यान जिसका सकल यान भार; या ऐसा ट्रेक्टर या रोड-रोलर जिसमें से किसी का लदान रहित भार, 12,000 किलोग्राम से अधिक है। (17) “भारी यात्री मोटर यान” से अभिप्रेत है ऐसा कोई लोक सेवा यान या प्राइवेट सेवा यान या शिक्षा संस्था बस या कोई बस जिसका सकल यान भार, या ऐसी मोटर कार जिसका लदान रहित भार, 12,000 किलोग्राम से अधिक है। [18. ***] [मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा विलोपित] (19) “शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति” से ऐसी अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा अध्याय 2 के अधीन दी गई है, और जो उसमें विनिर्दिष्ट व्यक्ति को शिक्षार्थी के रूप में कोई मोटर यान या किसी विनिर्दिष्ट वर्ग या वर्णन का मोटर यान चलाने के लिए प्राधिकृत करती है; (20) “अनुज्ञापन प्राधिकारी” से वह प्राधिकारी अभिप्रेत है जो अध्याय 2 या अध्याय 3 के अधीन अनुज्ञप्ति देने के लिए सशक्त है; (21) “हल्का मोटर यान” से अभिप्रेत है ऐसा कोई परिवहन यान या बस जिसमें से किसी का सकल यान भार, ऐसी मोटर कार या ट्रैक्टर या रोड-रोलर जिसमें से किसी का लदान रहित भार 7,500 किलोग्राम से अधिक नहीं है; (21-क) “विनिर्माता” से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो मोटर यानों के विनिर्माण में लगा है; (22) “बड़ी टैक्सी” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो भाड़े या पारिश्रमिक पर छह से अधिक किन्तु बारह से अनधिक यात्रियों का, जिसके अंतर्गत ड्राइवर नहीं है, वहन करने के लिए निर्मित या अनुकूलित है; (23) “मध्यम माल यान” से हल्के मोटर यान या भारी माल यान से भिन्न कोई माल वाहन अभिप्रेत है; (24) “मध्यम यात्री मोटर यान” से ऐसा कोई लोक सेवा यान या प्राइवेट यान या शिक्षा संस्था बस अभिप्रेत है जो मोटर साइकिल, रूपांतरित यान, हल्का मोटर यान या भारी यात्री मोटर यान से भिन्न है; (25) “मोटर टैक्सी” से ऐसा कोई मोटर यान अभिप्रेत है जो भाड़े या पारिश्रमिक पर अधिक से अधिक छह यात्रियों का, जिसके अंतर्गत ड्राइवर नहीं है, वहन करने के लिए निर्मित या अनुकूलित है; (26) “मोटर कार” से परिवहन यान, बस, रोड-रोलर, ट्रैक्टर, मोटर साइकिल या रूपांतरित यान से भिन्न कोई मोटर यान अभिप्रेत है; (27) “मोटर साइकिल’’ से दो पहियों वाला ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जिसमें मोटर यान से संलग्न, एक अतिरिक्त पहिए वाली साइड कार, जो पृथक की जा सकती है, सम्मिलित है; (28) “मोटर यान” या “यान” से कोई ऐसा यंत्र अभिप्रेत है जो सड़कों पर उपयोग के अनुकूल बना लिया गया है, चाहे उसमें नोदन शक्ति किसी बाहरी स्त्रोत से संचारित की जाती हो या आंतरिक स्त्रोत से और इसके अंतर्गत चैसिस, जिससे बॉडी संलग्न नहीं है और ट्रेलर भी है, किन्तु इसके अंतर्गत पटरियों पर चलने वाला यान-अथवा केवल कारखाने में या अन्य किसी सीमाबद्ध परिसर में उपयोग किए जाने के अनुकूल बना लिया गया विशेष प्रकार का यान या चार से कम पहियों वाला यान जिसमें पच्चीस घन सेंटी मीटर से अनधिक क्षमता वाला इंजन लगाया गया है, नहीं है; (29) “बस” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो छह से अधिक यात्रियों का, जिसके अंतर्गत ड्राइवर नहीं है, वहन करने के लिए निर्मित या अनुकूलित है; (30) “स्वामी” से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके नाम में मोटर यान रजिस्टर है और जहां ऐसा व्यक्ति अवयस्क है, वहां उस अवयस्क का संरक्षक अभिप्रेत है और उस मोटर यान के संबंध में जो अवक्रय करार या पट्टे के करार या आडमान के करार पर लिया गया है, वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका उस यान पर उस करार के अधीन कब्जा है; (31) “परमिट’’ से ऐसा परमिट अभिप्रेत है जो राज्य या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण ने या इस अधिनियम के अधीन इस निमित्त विहित प्राधिकारी ने किसी मोटर यान का परिवहन । यान के रूप में उपयोग करने के लिए प्राधिकृत करते हुए दिया है; (32) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; (33) “प्राइवेट सेवा यान” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो छह से अधिक व्यक्तियों का, जिसके अंतर्गत ड्राइवर नहीं है, वहन करने के लिए निर्मित या अनुकूलित है और साधारणतः ऐसे यान के स्वामी द्वारा या उसकी ओर से, भाड़े या पारिश्रमिक से अन्यथा उसके व्यापार या कारबार के लिए, या उसके संबंध में, व्यक्तियों का वहन करने के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाता है, किन्तु इसमें लोक प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाने वाला मोटर यान नहीं है; (34) “सार्वजनिक स्थान” से ऐसी सड़क, गली, मार्ग या अन्य स्थान, चाहे वह आम रास्ता हो या नहीं, अभिप्रेत है जिस पर जनता को पहुंच का अधिकार प्राप्त है, और इसके अंतर्गत कोई ऐसा स्थान या अड्डा भी है जहां पर मंजिली गाड़ी द्वारा यात्रियों को चढ़ाया या उतारा जाता है; (35) “सार्वजनिक सेवा यान” से ऐसा कोई मोटर यान अभिप्रेत है जिसका उपयोग भाड़े या पारिश्रमिक पर यात्रियों का वहन करने के लिए किया जाता है या जिसे उपयोग के अनुकूल बना लिया गया है तथा इसके अंतर्गत बड़ी टैक्सी, मोटर टैक्सी, ठेका गाड़ी और मंजिली गाड़ी भी है; (36) “रजिस्ट्रीकृत धुरी भार” से किसी यान की धुरी के संबंध में, धुरी भार अभिप्रेत है जिसकी बाबत रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी द्वारा यह प्रमाणित और रजिस्ट्रीकृत है कि वह उस धुरी के लिए अनुज्ञेय धुरी भार है; (37) “रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी’ से वह प्राधिकारी अभिप्रेत है जिसे अध्याय 4 के अधीन मोटर यानों को रजिस्टर करने के लिए सशक्त किया गया है। (38) “मार्ग” से यात्रा का वह पथ अभिप्रेत है जिसकी बाबत यह विनिर्दिष्ट है कि वह ऐसा राजमार्ग है जिसमें एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक मोटर यान आ जा सकता है; (38क) “स्कीम” से इस अधिनियम के अधीन विरचित स्कीम अभिप्रेत है; (39) “अर्द्ध ट्रेलर” से (ट्रेलर से भिन्न) कोई ऐसा यान अभिप्रेत है, जो यंत्र नोदित नहीं है और जो किसी मोटर यान से संयोजित किए जाने के लिए आशयित है तथा जो इस प्रकार निर्मित है, कि उसका एक प्रभाग उस मोटर यान के ऊपर है और उसके भार का एक भाग उस मोटर यान द्वारा वहन किया जाता है; (40) “मंजिली गाड़ी” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो भाड़े या पारिश्रमिक पर छह से अधिक यात्रियों का, जिसके अंतर्गत ड्राइवर नहीं है, पूरी यात्रा अथवा यात्रा की मंजिलों तक के लिए, अलग-अलग यात्रियों द्वारा या उनकी ओर से दिए गए अलग-अलग किरायों पर वहन करने के लिए, निर्मित या अनुकूलित है; (41) किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, “राज्य सरकार” से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त उसका प्रशासक अभिप्रेत है; (42) “राज्य परिवहन उपक्रम” से ऐसा कोई उपक्रम अभिप्रेत है जो वहां सड़क परिवहन सेवा की व्यवस्था करता है, जहां ऐसा उपक्रम निम्नलिखित द्वारा चलाया जाता है :- (i) केन्द्रीय सरकार या कोई राज्य सरकार; (ii) सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 (1950 का 64) की धारा 3 के अधीन स्थापित कोई सड़क परिवहन निगम; (iii) केन्द्रीय सरकार या एक या अधिक राज्य सरकारों के अथवा केन्द्रीय सरकार और एक या अधिक राज्य सरकारों के स्वामित्व या नियंत्रण में की कोई नगरपालिका या कोई निगम या कंपनी। (iv) जिला परिषद् या वैसा ही कोई अन्य स्थानीय प्राधिकारी । स्पष्टीकरण — इस खंड के प्रयोजनों के लिए, “सड़क परिवहन सेवा” से भाड़े या पारिश्रमिक पर सड़क मार्ग द्वारा यात्रियों या माल अथवा दोनों का वहन करने वाली मोटर यान सेवा अभिप्रेत है; (42क) “परीक्षण अभिकरण” से धारा 110ख के अधीन परीक्षण अभिकरण के रूप में नामनिर्दिष्ट निकाय अभिप्रेत है; (43) “पर्यटन यान” से ऐसी ठेका गाड़ी अभिप्रेत है जो उन विनिर्देशों के अनुसार निर्मित या अनुकूलित, सज्जित और अनुरक्षित है जिन्हें इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए; (44) “ट्रेक्टर” से ऐसा मोटर यान अभिप्रेत है जो स्वयं (नोदन के प्रयोजन के लिए काम में आने वाले उपस्कर से भिन्न) कोई भार वहन करने के लिए निर्मित नहीं है, किन्तु इसके अंतर्गत रोड-रोलर नहीं है। (45) “यातायात संकेत” के अंतर्गत सभी संकेत, चेतावनी-संकेत स्तंभ, दिशा सूचक स्तंभ, सड़कों पर चिन्हांकन या अन्य युक्तियां हैं जो मोटर यानों के ड्राइवरों की जानकारी, मार्गदर्शन या निर्देशन के लिए है। (46) “ट्रेलर” से अर्द्ध-ट्रेलर और साइड कार से भिन्न कोई ऐसा यान अभिप्रेत है जो मोटर यान के द्वारा खींचा जाता है अथवा खींचे जाने के लिए आशयित है; (47) “परिवहन यान” से कोई सार्वजनिक सेवा यान, माल वाहन, शिक्षा संस्था बस या प्राइवेट सेवा यान अभिप्रेत है; (48) “लदान रहित भार” से यान या ट्रेलर का ऐसे सभी उपस्कर सहित भार अभिप्रेत है, जिसका उपयोग मामूली तौर पर यान या ट्रेलर के चालू होने पर किया जाता है किन्तु इसमें ड्राइवर या परिचालक का भार सम्मिलित नहीं है तथा जहां आनुकल्पिक पुों या बॉडी का उपयोग किया जाता है वहां यान के लदान रहित भार से यान का, ऐसे सबसे भारी आनुकल्पिक पुर्जे या बॉडी सहित भार अभिप्रेत है; (49) “भार” से यान के पहियों द्वारा उस भू-तल पर, जिस पर वह यान टिका हुआ है या गतिमान होता है, उस समय संचारित किया जाने वाला कुल भार अभिप्रेत है ।
Definitions- In this Act, unless the context otherwise requires — (1) “adapted vehicle” means a motor vehicle either specially designed and constructed, or to which alterations have been made under sub-section (2) of section 52, for the use of a person suffering from any physical defect or disability, and used solely by or for such person; (1A)”aggregator” means a digital intermediary or market place for a passenger to connect with a driver for the purpose of transportation; (1B) “area”, in relation to any provision of this Act, means such area as the State Government may, having regard to the requirements of that provision, specify by notification in the Official Gazette;] (2) “articulated vehicle” means a motor vehicle to which a semitrailer is attached; (3) “axle weight” means in relation to an axle of a vehicle the total weight transmitted by the several wheels attached to that axle to the surface on which the vehicle rests; (4) “certificate of registration” means the certificate issued by a competent authority to the effect that motor vehicle has been duly registered in accordance with the provisions of Chapter IV; (4A) “community service” means an unpaid work which a person is required to perform as a punishment for an offence committed under this Act; (5) “conductor”, in relation to a stage carriage, means a person engaged in collecting fares from passengers, regulating their entrance into, or exit from, the stage carriage and performing such other functions as may be prescribed; (6) “conductor’s licence” means the licence issued by a competent authority under Chapter III authorising the person specified therein to act as a conductor; (7) “contract carriage” means a motor vehicle which carries a passenger or passengers for hire or reward and is engaged under a contract, whether expressed or implied, for the use of such vehicle as a whole for the carriage of passengers mentioned therein and entered into by a person with a holder of a permit in relation to such vehicle or any person authorised by him in this behalf on a fixed or an agreed rate or sum- (a) on a time basis, whether or not with, reference to any route or distance; or (b) from one point to another, and in either case, without stopping to pick up or set down passengers not included in the contract anywhere during the journey, and includes– (i) a maxicab; and (ii) a motorcab notwithstanding that separate fares are charged for its passengers; (8) “dealer” includes a person who is engaged (b) in building bodies for attachment to chassis; or (c) in the repair of motor vehicles; or (d) in the business of hypothecation, leasing or hire-purchase of motor vehicle; (9) “driver” includes, in relation to a motor vehicle which is drawn by another motor vehicle, the person who acts as a steersman of the drawn vehicle; (9A) “driver refresher training course” means the course referred to in sub-section (2A) of section 19; (10) “driving licence” means the licence issued by a competent authority under Chapter II authorising the person specified therein to drive, otherwise than as a learner, a motor vehicle or a motor vehicle of any specified class or description; (11) “educational institution bus” means an omnibus, which is owned by a college, school or other educational institution and used solely for the purpose of transporting students or staff of the educational institution in connection with any of its activities; (12) “fares” includes sums payable for a season ticket or in respect of the hire of a contract carriage; (12A) “golden hour” means the time period lasting one hour following a traumatic injury during which there is highest likelihood of preventing death by providing prompt medical care;] (13) “goods” includes live-stock, and anything (other than equipment ordinarily used with the vehicle) carried by a vehicle except living persons, but does not include luggage or personal effects carried in a motor car or in a trailer attached to a motor car of the personal luggage of passengers travelling in the vehicle; (14) “goods carriage” means any motor vehicle constructed or adapted for use solely for the carriage of goods, or any motor vehicle not so constructed or adapted when used for the carriage of goods; (15) “gross vehicle weight” means in respect of any vehicle the total weight of the vehicle and load certified and registered by the registering authority as permissible for that vehicle; (16) “heavy goods vehicle” means any goods carriage the gross vehicle weight of which, or a tractor or a road-roller. The unladen weight of either of which, exceeds 12,000 kilograms; (17) “heavy passenger motor vehicle” means any public service vehicle or private service vehicle or educational institution bus or omnibus the gross vehicle weight of any of which, or a motor car the unladen weight of which, exceeds 12,000 kilograms; [18. ***] (19) “learner’s licence” means the licence issued by a competent authority under Chapter II authorising the person specified therein to drive as a learner, a motor vehicle or a motor vehicle of any specified class or description; for of (20) “licensing authority” means an authority empowered to issue licences under Chapter II or, as the case may be, Chapter III; (21) “light motor vehicle” means a transport vehicle or omnibus the gross vehicle weight of either of which or a motor car or tractor or road-roller the unladen weight of any of which, does not exceed [7500] kilograms; (21A) “manufacturer” means a person who is engaged in the manufacture of motor vehicles; (22) “maxicab” means any motor vehicle constructed or adapted to carry more than six passengers, but not more than twelve passengers, excluding the driver, for hire or reward; (23) “medium goods vehicle” means any goods carriage other than a light motor vehicle or a heavy goods vehicle; (24) “medium passenger motor vehicle” means any public service vehicle or private service vehicle, or educational institution bus other than a motorcycle, [adapted vehicle], light motor vehicle or heavy passenger motor vehicle; (25) “motorcab” means any motor vehicle constructed or adapted to carry not more than six passengers excluding the driver for hire or reward; (26) “motor car” means any motor vehicle other than a transport vehicle, omnibus, road-roller, tractor, motorcycle or adapted vehicle; (27) “motor cycle” means a two-wheeled motor vehicle, inclusive of any detachable side-car having an extra wheel, attached to the motor vehicle; (28) “motor vehicle” or “vehicle” means any mechanically propelled vehicle adapted for use upon roads whether the power of propulsion is transmitted thereto from an external or internal sour and includes a chassis to which a body has not been attached and a trailer, but does not include a vehicle running upon fixed rails or a vehicle of a special type adapted for use only in a factory or in any other enclosed premises or a vehicle having less than four wheels fitted with engine capacity of not exceeding twenty-five cubic centimeters; (29) “omnibus” means any motor vehicle constructed or adapted to carry more than six persons excluding the driver; (30) “owner” means a person in whose name a motor vehicle stands registered, and where such person is a minor, the guardian of such minor, and in relation to a motor vehicle which is the subject of a hire-purchase agreement, or an agreement of lease or an agreement of hypothecation, the person in possession of the vehicle under that agreement; (31) “permit” means a permit issued by a State or Regional Transport Authority or an authority prescribed in this behalf under this Act authorising the use of a motor vehicle as a transport vehicle; (32) “prescribed” means prescribed by rules made under this Act; (33) “private service vehicle” means a motor vehicle constructed or adapted to carry more than six persons excluding the driver and ordinarily used by or on behalf of the owner of such vehicle for the purpose of carrying persons for, or in connection with, his trade or business otherwise than for hire or reward but does not include a motor vehicle used for public purposes; (34) “public place” means a road, street, way or other place, whether a thoroughfare or not, to which the public have a right of access, and includes any place or stand at which passengers are picked up or set down by a stage carriage; (35) “public service vehicle” means any motor vehicle used or adapted to be used for the carriage of passengers for hire or reward, and includes a maxicab, a motorcab, contract carriage, and stage carriage; (36) “registered axle weight” means in respect of the axle of any vehicle, the axle weight certified and registered by the registering authority as permissible for that axle; (37) “registering authority” means an authority empowered to register motor vehicles under Chapter IV; (38) “route” means a line of travel which specifies the highway which may be traversed by a motor vehicle between one terminus and another; (38A) “scheme” means a scheme framed under this Act; (39) “semi-trailer” means a vehicle not mechanically propelled (other than a trailer), which is intended to be connected to a motor vehicle and which is so constructed that a portion of it is super-imposed on, and a part of whose weight is borne by, that motor vehicle; (40) “stage carriage” means a motor vehicle constructed or adapted to carry more than six passengers excluding the driver for hire or reward at separate fares paid by or for individual passengers, either for the whole journey or for stages of the journey; (41) “State Government” in relation to a Union territory means the Administrator thereof appointed under article 239 of the Constitution; (42) “State transport undertaking” means any undertaking providing road transport service, where such Undertaking is carried on by — (i) the Central Government or a State Government; (ii) any Road Transport Corporation established under section 3 of the Road Transport Corporations Act, 1950 (64 of 1950); (iii) any municipality or any corporation or company-owned or controlled by the Central Government or one or more State Governments, or by the Central Government and one or more State Governments. (iv) Zila Parishad or any other similar local authority. Explanation — For the purposes of this clause, “road transport service” means a service of motor vehicles carrying passengers or goods or both by road for hire or reward; (42A) “testing agency” means any entity designated as a testing agency under section 110B; (43) “tourist vehicle” means a contract carriage constructed or adapted and equipped and maintained in accordance with such specifications as may be prescribed in this behalf; (44) “tractor” means a motor vehicle which is not itself constructed to carry any load (other than equipment used for the purpose of propulsion); but excludes a road-roller; (45) “traffic signs” includes all signals, warning signposts, direction posts, markings on the road or other devices for the information, guidance or direction of drivers of motor vehicles; (46) “trailer” means any vehicle, other than a semi-trailer and a side-car, drawn or intended to be drawn by a motor vehicle; (47) “transport vehicle” means a public service vehicle, a goods carriage, an educational institution bus or a private service vehicle; (48) “unladen weight” means the weight of a vehicle or trailer including all equipments ordinarily used with the vehicle or trailer when working, but excluding the weight of a driver or attendant; and where alternative parts or bodies are used the unladen weight of the vehicle means the weight of the vehicle with the heaviest such alternative part or body; (49) “weight” means the total weight transmitted for the time being by the wheels of a vehicle to the surface on which the vehicle rests [or moves).
हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 2 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 1 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 1, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा-1 का विवरण
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -1 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मोटर यान अधिनियम 1988 है। इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है। यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र मे अधिसूचना व्दारा नियत करे और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिये भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी तथा इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का, किसी राज्य के संबंध मे यह अर्थ लगाया जायेगा कि वह उस राज्य मे इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 1 के अनुसार
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंम्भ-
(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मोटर यान अधिनियम 1988 है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है। (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र मे अधिसूचना व्दारा नियत करे और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिये भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी तथा इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का, किसी राज्य के संबंध मे यह अर्थ लगाया जायेगा कि वह उस राज्य मे इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है।
Short title, extent and commencement— (1) This Act may be called the Motor Vehicles Act, 1988. (2) It extends to the whole of India. (3) It shall come into force on such date as the Central Government may, by notification in the Official Gazette, appoint; and different dates may be appointed for different State and any reference in this Act to the commencement of this Act shall, in relation to a State, be construed as a reference to the coming into force of this Act in that State.
हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 1 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
आज हम मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Motor Vehicle Act 1988) सम्बन्धी जानकारी जैसे जुर्माना और दंड कब, क्यो लगता है और कब कब इस अधिनियम मे संसोधन किये गये है। इसके अलावा यह अधिनियम क्यो बनाया गया इसका मुख्य उद्देश्य क्या था, इस कानून को बनाने के मुख्य कारण क्या था। इस कानून मे कितनी धाराये है और कैसे क्या अर्थदण्ड का प्रावधान है। यह सभी जानकारी आज हम लेख के माध्यम से समझेंगे।
हम सभी जानते है हर देश मे मोटर वाहन चलते है, इन्हे कैसे चलाना है और कैसे कानून का पालन भी करना है यह अधिनियम हमे बताता है मोटर वाहन अधिनियम प्रत्येक देश मे अपने अलग-अलग होते है। हमारे भारत देश मे मोटर वाहन अधिनियम 1988 भी इसी कारण बनाया गया। यह कानून प्रत्येक नागरिक को अपने मोटर वाहन सड़क परिवहन नियम को फॉलो करने के लिये भी बनाया गया है। इस कानून के अन्तर्गत सड़क परिवहन वाहनों के प्रत्येक पहलुओं को नियन्त्रित करता है जैसे वाहन का रजिस्ट्रेशन, ड्राइवर एवंम् कडंक्टरों के लाइसेंस, वाहनो को परमिट देना, बीमा जैसे प्रावधानों को यह अधिनियम बताता है।
मोटर वाहन अधिनियम का ढंग से पालन भी हो इसके लिये इस अधिनियम मे अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है, हमारे देश मे बहुत से लोग एक्सीडेन्ट का शिकार इसी कारण से हो जाते है, कि वे गलत तरीके से इस अधिनियम का उलंघन करके अपने वाहन को चलाते है, जिसकी वजह से कभी कभी, किसी व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है इसलिये इस अधिनियम मे सख्ती लाने के लिये दंड का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
मोटर वाहन अधिनियम 1988 क्या है?
मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Motor Vehicle Act 1988) भारत के संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है, जिसे केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम भी कहते है। जो सड़क परिवहनवाहनों के सभी पहलुओं को नियंत्रित करता है। मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइवर / कंडक्टरों के लाइसेंस, मोटर वाहनों के पंजीकरण, परमिट के माध्यम से मोटर वाहनों पर नियंत्रण, राज्य परिवहन उपक्रमों से संबंधित विशेष प्रावधान, यातायात विनियमन, बीमा, देयता, अपराध और दंड, आदि के बारे में विधायी प्रावधान दिए गए हैं। यह कानून सम्पूर्ण भारत पर लागू होता है।
यह अधिनियम सड़क परिवहन वाहनों पर लागू होता है कि अपने वाहन को कैसे चलाना है और वाहन चलाने के लिये हमे कौन कौन से कागज की भी अवश्यकता पड़ेगी इसके अलावा वाहन चलाते समय इस बात का ध्यान भी रखना आवश्यक है कि हम कही इस अधिनियम का उलंघन तो नही कर रहे है और यदि कोई व्यक्ति इस कानून का उलंघन करता है, तो वह अर्थदण्ड एवंम् दंड अथवा दोनों का भागीदार होगा।
मोटर वाहन अधिनियम संसोधन 2019
मोटर वाहन अधिनियम में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने बेहद कठोर प्रावधान रखे हैं। 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं। संसद की स्थायी समिति ने इन सिफारिशों की विस्तार से जाँच की और समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन्हें अधिनियम में शामिल किया गया है। इस अधिनियम में केंद्र सरकार के लिये मोटर वाहन दुर्घटना कोष के गठन की बात कही गई है जो भारत में सड़क का उपयोग करने वालों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा। इस अधिनियम में यातायात के नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
सड़क दुर्घटना पीड़िता को मुवाजना देने की बात की गयी है, इसके अलावा पीड़ित को कैशलेस उपचार करने की योजना विकसित की गयी। अधिनियम के अनुसार, ‘गोल्डन आवर’ घातक चोट के बाद की एक घंटे की समयावधि होती है जब तत्काल मेडिकल देखभाल से मृत्यु से बचाव की संभावना सबसे अधिक होती है। केंद्र सरकार थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत मुआवज़े का दावा करने वालों को अंतरिम राहत देने की बात कही गयी है। अधिनियम में हिट एंड रन के मामलों में न्यूनतम मुआवज़े को बढ़ा दिया गया है।
(i) मृत्यु की स्थिति में 25,000 रुपए से बढ़ाकर 2,00,000 रुपए और
(ii) गंभीर चोट की स्थिति में 12,500 से बढ़ाकर 50,000 रुपए।
इस योजना के अन्तर्गत दुर्घटना के दौरान वाहन का बीमा होना अनिवार्य है। इस योजना का लाभ मोटर वाहन दुर्घटना कोष व्यय करेगी। योजना के महत्वपूर्ण स्थितियों मे उपयोग किया जा सकेगा
गोल्डन आवर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का उपचार।
हिट और रन मामलों में मौत का शिकार होने वाले लोगों के प्रतिनिधियों को मुआवज़ा देना।
हिट और रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को मुआवज़ा देना और
केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किये गए व्यक्तियों को मुआवज़ा देना।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराध एवंम् अर्थदंड एवंम् दंड का प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत जो कोई व्यक्ति उलंघन करेगा, जुर्माना एवंम् दंड से दण्डित किया जायेगा। अर्थदंड का प्रावधान मे अगर कोई प्रदेश बदलाव करना चाहती है, तो प्रदेश सरकार बदलाव कर सकती है इसके अलावा अब नये अर्थदंड मे बदलाव एवंम् अन्य नये नियम मे भी बदलाव किये गये है। जो निम्न प्रकार है-
धारा
अपराध
पुराना जुर्माना
नया जुर्माना
177
सामान्य
100 रूपये
500 रूपये
177A
सड़क विनियमन उलंघन
100 रूपये
500 रूपये
178
बिना टिकट यात्रा
200 रूपये
500 रूपये
179
अधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा
500 रूपये
2000 रूपये
180
बिना लाइसेंस वाहनों का अनधिकृत प्रयोग
1000 रूपये
5000 रूपये
181
बिना लाइसेंस ड्राइविंग
500 रूपये
5000 रूपये
182
आयोग्यता के बावजूद वाहन चालन
500 रूपये
10000 रूपये
182B
आकार से बड़े वाहन
नही (नया बदलाव)
5000 रूपये
183
गति से ऊपर चलाना
400 रूपये
1000 रूपये एलएमवी के लिये 2000 रूपये मध्य रात्रि वाहन
184
खतरनाक ड्राइविंग पर जुर्माना
1000 रूपये
5000 रूपये तक
185
शराब पीकर ड्राइविंग
2000 रूपये
10000 रूपये
189
स्पीडिंग/रेसिंग
500 रूपये
5000 रूपये
192A
बिना परमिट वाहन
5000 रूपये तक
10000 रूपये तक
193
लाइसेंस शर्तो का उलंघन
नही (नया बदलाव)
25000 रूपये से 100000 रूपये
194
ओवरलोडिंग
2000 रूपये और 1000 रू प्रति अतिरिक्त टन
20000 रूपये और 2000 रू प्रति अतिरिक्त टन
194A
यात्रियों की ओवरलोडिंग
नही (नया बदलाव)
1000 अतिरिक्त यात्री
194B
सीट बेल्ट
100 रूपये
1000 रूपये
194C
दुपहिया की ओवरलोडिंग
100 रूपये
2000 रूपये, 3 माह के लिये लाइसेंस रद्द
194D
हेलमेट
100 रूपये
1000 रूपये, 3 माह के लिये लाइसेंस रद्द
194E
आपालकालीन वाहनों को मार्ग न देना
नही (नया बदलाव)
10000 रूपये
196
बिना बीमा वाहन चलाना
1000 रूपये
2000 रूपये
199
किशोरों व्दारा अपराध
नही (नया बदलाव)
अभिवावक/वाहन स्वामी दोषी माना जायेंगा। 25000 का दंड 3 साल का कारावास। किशोर पर जेजे एक्ट के तहत केस और वाहन का पंजीकरण भी रद्द
206
दस्तावेज जब्त करने की अधिकारियों की शक्ति
नही (नया बदलाव)
धारा 183, 184, 185,189, 190, 194C, 194D, और 194E के तहत ड्राइविंग लाइसेेंस रद्द
210B
नियुक्त अधिकारियों व्दारा किये अपराध
नही (नया बदलाव)
प्रासंगिक धारा के अंतर्गत दो गुना जुर्माना
मोटर वाहन अधिनियम 1988 में कुल कितनी धाराएं हैं?
मोटर वाहन अधिनियम मे वर्तमान मे कुल 223 धाराये है, जिन्हे 14 अध्यायों मे विभाजित किया गया है। इस अधिनियम मे सरकार व्दारा समय समय से कई बदलाव किये गये है।
196 – बीमा न किए गए यान को चलाना (Driving uninsured vehicle)
197 – प्राधिकार के बिना यान ले जाना (Taking vehicle without authority)
198 – यान में अनधिकृत हस्तक्षेप (Unauthorised interference with vehicle)
198A – सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रख-रखाव के मानकों का अनुपालन करने में असफल रहना (Failure to comply with standards for road design, construction and maintenance)
199 – कंपनियों द्वारा अपराध (Offences by companies)
199A – किशोर द्वारा अपराध (Offences by Juveniles)
199B – जुर्मानों का पुनरीक्षण (Revision of fines)
200 – कतिपय अपराधों का शमन (Composition of certain offences)
201 – यातायात के मुक्त प्रवाह में अवरोध डालने के लिए शास्ति (Penalty for causing obstruction to free flow of traffic)
202 – वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति (Power to arrest without warrant)
203 – श्वास-परीक्षण (Breath tests)
204 – प्रयोगशाला परीक्षण (Laboratory test)
205 – मोटर यान चलाने की अयोग्यता की उपधारणा (Presumption of unfitness to drive)
206 – पुलिस अधिकारी की दस्तावेज परिबद्ध करने की शक्ति (Power of police officer to impound document)
207 – रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र, परमिट, आदि के बिना उपयोग किए गए यानों को निरुद्ध करने की शक्ति (Power to detain vehicles used without certificate of registration permit, etc.)
208 – मामलों का संक्षिप्त निपटारा (Summary disposal of cases)
209 – दोषसिद्धि पर निर्बंधन (Restriction on conviction)
210 – दोषसिद्धि संबंधी सूचना का न्यायालयों द्वारा भेजा जाना (Courts to send intimation about conviction)
210A – शास्तियों में वृद्धि करने की राज्य सरकार की शक्ति (Power of State Government to increase penalties)
210B – प्रवर्तनकारी प्राधिकरण द्वारा किए गए अपराध के लिए शास्ति (Penalty for offence committed by an enforcing authority)
210C – केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति (Power of Central Government to make rules)
210D – राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति (Power of State Government to make rules)
211 – फीस उद्गृहीत करने की शक्ति (Power to levy fee)
211A – दस्तावेजों और प्ररूपों का इलैक्ट्रानिक उपयोग (Use of electronic forms and documents)
212 – नियमों और अधिसूचनाओं का प्रकाशन, प्रारंभ और रखा जाना (Publication, commencement and laying of rules and notifications)
213 – मोटर यान अधिकारियों की नियुक्ति (Appointment of motor vehicles officers)
214 – आरंभिक प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों पर अपील और पुनरीक्षण का प्रभाव (Effect of appeal and revision on orders passed by original authority)
215 – सड़क सुरक्षा परिषदें और समितियां (Road Safety Councils and Committees)
215A – केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा शक्तियों के प्रत्यायोजित किए जाने की शक्ति (Power of Central government and State Government to delegate)
215B – राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (National Road Safety Board)
215C – केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति (Power of Central Government to make rules)
215D – राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति (Power of State Government to make rules)
216 – कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति (Power to remove difficulties)
217 – निरसन और व्यावृत्तियां (Repeal and savings)
217A – मोटर यान अधिनियम, 1939 के अधीन अनुदत्त परमिट, चालक अनुज्ञप्ति और रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण (Renewal of permits, driving licences and registration granted under the Motor Vehicles Act, 1939)
आज हम निजता का अधिकार (Right to Privacy) के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करेेंगे। निजता का अधिकार किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार वंचित करने से रोकने के लिये यह अनुच्छेद-21 (Article-21) को बनाया गया। इसके अलावा (Article-21) किसी व्यक्ति को उसकी निजी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है, यदि कोई अन्य व्यक्ति या कोई संस्था किसी व्यक्ति के इस अधिकार का उल्लंघन करती है या करने का प्रयास करती है, तो पीड़ित व्यक्ति को सीधे उच्चतम न्यायलय तक जाने का अधिकार होता है।
HIGHLIGHTS
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण)
जब भारतीय संविधान को लागू किया गया था तब अनुच्छेद-21(Article-21) को मौलिक अधिकार मे नही रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे कमियों को देखते हुये संविधान मे कई बदलाव किये गये, जिनमे यह Right to Privacy अधिकार मे भी बदलाव किया गया, जिसे मौलिक अधिकार मे शामिल किया गया। निजता का अधिकार, समानता का अधिकार है या फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हो, इन सभी बातों को ध्यान मे रखते हुये, सुप्रीम कोर्ट कई न्यायिक निर्णय भी इस मद मे आये हुये है। इन फैसलों के आधार पर निजता का अधिकार, समानता का अधिकार एवंम् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को मौलिक अधिकारों मे शामिल किया गया।
इस अनुच्छेद-21 को अन्य भाषा मे समझे जैसे कोई, किसी व्यक्ति के साथ क्रूरता, अमाननीय उत्पीड़न या अपमानजनक व्यवहार अथवा कोई सरकारी कर्मचारी व्दारा कोई ऐसी स्वतंत्रता को बाधित करता है, तो ऐसा करना वर्जित होगा, क्योकि हमारे संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति के पास यह मौलिक अधिकार दिया गया है कि कोई उसके जीवन और निजता की स्वतंत्रता को ठेस नही पहुचा सकता है।
निजता का अधिकार इतनी आसानी से नही समझा जा सकता है, क्यो कि निजता का अधिकार प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्त पर लागू होता है आम तौर पर निजता हमारे शरीर, घर, सम्पत्ति, विचार, भावना, रहस्य और पहचान को अपने निजी रखने का अधिकार देता है, इस तरह से शरीरिक रक्षा ही नही बल्कि हमारी निजी जानकारियों की रक्षा प्रदान करने के लिये यह कानून बनाया गया है, जिसे अब हमारा मौलिक अधिकार भी घोषित कर दिया गया है। सभी लोकतंत्र सरकार द्वारा नागरिकों को सामान अवसर प्रदान कराने में हर एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से कुछ भिन्न है, अतः सामान अवसर प्रदान कराने में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक नागरिक की वजह से दूसरे नागरिक के साथ किसी भी प्रकार से से समझौता नहीं होना चाहिए।
भारतीय संविधान सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक के पास अपने कई मौलिक अधिकार होते है, जो कि किसी भी नागरिक को देश मे सुचारू रूप से सम्मान के साथ रहने, हक प्रदान करने, बराबरी का अधिकार, शैक्षणिक और सांस्कृतिक अधिकार प्राप्त करने का हक प्रदान करता है, इसी तरह से समाज मे रहने वाले प्रत्येक नागरिकों को यह निजता का अधिकार भी दिया गया है, जिसे हम Right to Privacy भी कहते है। इस कानून के तहत कोई किसी व्यक्ति पर इस तरह से अधिकारों को वर्जित नही कर सकता है।
अनुच्छेद-21 क्या है? (What is Article-21?)
भारत के संविधान के भाग-3 मे अनुच्छेद (12-35) तक के सभी आर्टिकल मे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान किया गया है। भारत के रहने वाले प्रत्येक नागरिकों को यह मौलिक अधिकार दिया गया है, जिसका कोई दुरूपयोग नही करता सकता है। यह अधिकार व्यक्ति के व्यक्तिगत् स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है। यह मौलिक अधिकार दो प्रकार के होते है-
कुछ केवल नागरिकों को प्रदत्त अधिकार
कुछ व्यक्ति को प्रदत्त अधिकार
संविधान के भाग-3 के अनुच्छेद-21 मे भारत मे रहने वाले प्रत्येक नागरिको को “जीवन और स्वतंत्रता” का यह मौलिक अधिकार दिया गया है।
यह मौलिक अधिकार भारत मे रहने वाले प्रत्येक नागरिक अपने जीवन/प्राण रक्षा हेतु समस्त जानकारी, निजी रूप से रखना मौलिक अधिकार है।
निजता का अर्थ क्या है? (What is the meaning of privacy?)
निजता (Privacy) का अर्थ किसी व्यक्ति या किसी सांस्था अथवा किसी समूह की अपनी गोपनीय जानकारी/महत्वपूर्ण जानकारी, निजता कहलाती है, निजता किसी के जीवन, स्वास्थ, सम्पत्ति, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदि महत्वपूर्ण जानकारी जिससे वह अपनी एवंम् अपने परिवार की रक्षा के लिये उपयोग मे ला सकेगा।
किसी व्यक्ति अथवा सास्थां के निजी जीवन सम्बन्धी समस्त जानकारी जिसका कोई दूसरा व्यक्ति अतिक्रमण कर सकता है, तो प्रत्येक व्यक्ति अथवा सास्था के पास यह अधिकार होता है कि वह ऐसे अपनी निजी जानकारी को गोपनीय रखे, जिससे कोई व्यक्ति दुरूपयोग न कर सके।
आर्टिकल-21 (Article-21) के अनुसार-
प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण–
“किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।“
Protection of life and personal liberty- “No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to procedure established by law.”
यह अनुच्छेद भारत के प्रत्येक नागरिक के जीवन जीने और उसकी निजी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है, कि कोई किसी व्यक्ति के जीवन मे बाधा न बने, फिर भी कोई अन्य व्यक्ति या कोई संस्था किसी व्यक्ति के इस अधिकार का उल्लंघन करता है या करने का प्रयास करता है, तो पीड़ित व्यक्ति को सीधे उच्चतम न्यायलय तक जाने का अधिकार होता है। स्पष्ट शब्दों में किसी भी प्रकार का क्रूर, अमाननीय उत्पीड़न या अपमान जनक व्यवहार चाहे वह किसी भी प्रकार की जॉंच के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न से या किसी अन्य स्थान पर हो, तो यह इस अनुच्छेद 21 का अतिक्रमण करता है, जो कि भारतीय संविधान के अनुसार वर्जित है। यह एक मूल अधिकार है, इसमें कहा गया है, कि किसी व्यक्ति को उसके जीवन और निजता की स्वतंत्रता से वंछित किये जाने संबंधी उचित कार्यवाही होनी चाहिए। यह सब अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है।
क्याहैनिजीस्वतंत्रताकाअधिकार?
निजी स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Privacy) का अधिकार हमारे संविधान मे अनुच्छेद-21 (Article-21) मे वर्णन किया गया है, जिसका मुख्य उदे्श्य भारत के प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन की स्वतंत्रता प्रदान करता है। भारत के प्रत्येक नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हमारे संविधान मे निजी स्वतंत्रता का कानून बनाया गया, इस कानून के अन्तर्गत भारत के प्रत्येक नागरिकों के अपने अधिकार दिये गये है, जो निम्नप्रकार है-
भारतीय संविधान के Right to Privacy के अंतर्गत कोई व्यक्ति अपनी निजी जानकारी किसी भी समय किसी भी अथॉरिटी या किसी व्यक्ति से प्राप्त कर सकता है।
यदि किसी
भी प्रकार के दस्तावेज में किसी व्यक्ति की निजी जानकारियों में किसी भी प्रकार की त्रुटी हो गयी है, या कोई आवश्यक जानकारी छूट गयी है, तो वह व्यक्ति उस जानकारी को संशोधित करने के लिए आवेदन कर सकता है, और बिना किसी परेशानी के अपने दस्तावेजों को संसोधित करा सकता है।
बिना किसी क़ानूनी नोटिस या समन के जिसमे न्यायालय द्वारा किसी बड़े मुद्दे को हल करने के लिए अपनी कुछ निजी जानकारी साझा करने का आदेश हो सकता है, तो ऐसे आदेश के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के सामने अपनी निजी जानकारी व्यक्त न करने की स्वतंत्रता भी इस अधिकार के अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त होती है।
इस निजी स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत किसी भी नागरिक को इस बात की स्वतंत्रता भी प्राप्त होती है, कि केवल वह यदि चाहे तो ही केवल उसकी निजी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के पास जाएगी अन्यथा नहीं जायेगी।
निजी स्वतंत्रता का अधिकार इस बात की भी स्वतंत्रता भी देता है, कि एक व्यक्ति यह स्वयं तय कर सकता है, कि क्या राज्य उस व्यक्ति की निजी ज़िन्दगी के विषय में जान सकता है, यदि वह व्यक्ति राज्य को इस बात की अनुमति प्रदान नहीं करता है, तो राज्य की कोई भी अथॉरिटी उस व्यक्ति को उसकी निजी जानकारी साझा करने के लिए बाधित नहीं कर सकती है, और यदि कोई व्यक्ति या संस्था उस व्यक्ति को उसकी निजी जानकारी साझा करने के लिए बाधित करती है, तो वह व्यक्ति बिना किसी परेशानी के सीधे माननीय सर्वोच्छ न्यायालय में अपने निजी स्वतंत्रता के अधिकार के उल्लंघन के लिए अपील कर सकता है, और जहां से उस व्यक्ति को इन्साफ मिलेगा।
इस अधिकार के अनुसार कोई व्यक्ति जो जानकारी केवल अपने तक ही सीमित रखना चाहता है, वह केवल उसके ही पास रहेगी, किसी और व्यक्ति या संस्था के पास उस व्यक्ति की उस जानकारी को जानने का किसी प्रकार का कोई हक नहीं होगा।
अन्य मौलिक अधिकार
भारत के संविधान मे मौलिक अधिकारों को समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय व्दारा त्रुटियों को देखते हुये अन्य मौलिक अधिकारो को इस सूची मे शामिल किया गया, जो निम्नप्रकार है-
एकांतता का अधिकार
विदेश यात्रा का अधिकार
जीविकोपार्जन का अधिकार
मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार
शिक्षा का अधिकार
आहार पाने का अधिकार
स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
शीघ्र विचारण का अधिकार
चिकित्सा सहायता पाने का अधिकार
आश्रय का अधिकार
सार्वजनिक धूम्रपान पर निषेध
अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध संरक्षण
जीवन जीने के अधिकार के अंतर्गत निम्न अधिकारों को भी सम्मिलित किया गया है
चिकित्सा का अधिकार
शिक्षा का अधिकार
पर्यावरण संरक्षण का अधिकार
त्वरित विचारण का अधिकार
कामकाजी महिलाओं का यौन शोषण से संरक्षण का अधिकार
निशुल्क विधिक सहायता का अधिकार
लावारिस मृतकों का शिष्टता एवं शालीनता से दाह संस्कार का अधिकार
भिखारियों के पुनर्वास का अधिकार
धूम्रपान से संरक्षण का अधिकार
विद्यार्थियों का रैगिंग से संरक्षण का अधिकार
सौंदर्य प्रतियोगिताओं में नारी गरिमा को बनाए रखने का अधिकार
बिजली एवं पानी का अधिकार
हथकड़ी, बेडियों एवं एकांतवास से संरक्षण का अधिकार
प्रदूषण रहित जल एवं हवा का उपयोग करने का अधिकार
अनुच्छेद-21 (Article-21) का मुख्य उदे्श्य
आर्टिकल-21 किसी नागरिक के जीवन और सुरक्षा को ध्यान मे रखते हुये बहुत से अधिकारों को मौलिक अधिकारों मे सम्मलित किया गया है, जिसका उदे्श्य सिर्फ इतना सा है कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो, इसके अलावा सबको समान अधिकार और समान सम्मान प्राप्त हो, कोई भी अपने अधिकारों से वंचित न हो। किसी भी नागरिक को अपने अधिकारों से वंचित न किया जाये।
हमारा प्रयास अनुच्छेद-21 (Article-21) निजता का अधिकार (Right to Privacy) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।